सूरए ताहा की आयत क्रमांक 5 और 6 का अनुवादः
दयावान (ईश्वर) सिंहासन पर पूरे प्रभुत्व के साथ मौजूद है। जो कुछ आकाशों, धरती और उन दोनों के बीच तथा धरती के नीचे है केवल उसी का है।
संक्षिप्त टिप्पणी:
चूंकि संसार की रचना, लोगों पर प्रभुत्व और ईश्वरीय शासन का आधार, उसकी अनंत दया व कृपा है अतः इन आयतों में ईश्वर ने स्वयं को दयावान कह कर परिचित कराया है।
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
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मनुष्यों सहित संपूर्ण सृष्टि का संचालन ईश्वरीय दया के आधार पर होता है।
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सृष्टि की हर वस्तु पर ईश्वर का प्रभुत्व एक समान है और सभी उसके आज्ञापालक हैं।